UP News: धरी रह गई यूपी के आयोगों के माननीयों की जिलों में ठसक दिखाने की तमन्ना

Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: उत्तर प्रदेश के तमाम आयोगों में बैठी सियासी हस्तियों के लिए अब वीआईपी ट्रीटमेंट पाने का सपना कभी पूरा नहीं हो सकेगा। प्रोटोकॉल विभाग के मुताबिक शासनादेश में दिए प्रावधानों के अतिरिक्त कोई भी विशेष सुविधा नहीं दी जा सकती है। जिसके बाद जिलों में भ्रमण के दौरान आयोगों के सदस्य अब ठसक नहीं दिखा पाएंगे।
प्रोटोकॉल विभाग ने एससी एसटी आयोग को भेजा जवाब, नहीं मिल सकता वीआईपी प्रोटोकॉल
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के पत्र के जवाब में प्रोटोकॉल विभाग के संयुक्त सचिव अजय कुमार ओझा ने कहा है कि समाज कल्याण अनुभाग-1 के शासनादेश दिनांक 14-08-2014 में मानदेय, भत्ते और अन्य सुविधाओं के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रस्तर-तीन के बिन्दु संख्या-10 में उल्लिखित है कि आयोग के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष और सदस्य को शासनादेश के मुताबिक मानदेय, भत्ते एवं अन्य सुविधाओं के सिवा अन्य सुविधा नहीं दी जायेगी।

वहीं प्रोटोकाल विभाग द्वारा सिर्फ प्रदेश में पधारने वाले विशिष्ट/अति विशिष्ट महानुभावों के लिए राज्य आतिथ्य/आतिथ्य एवं प्रोटोकाल सहित सुरक्षा व्यवस्था दिए जाने के सम्बन्ध में कार्यवाही की जाती है। आयोग के सदस्य, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष उ0प्र0 राज्य अतिथि नियमावली से आच्छादित नहीं हैं। प्रोटोकॉल विभाग के पत्र के बाद जिलों में दौरों के दौरान किसी भी प्रकार की वीआईपी सुविधा एससी एसटी आयोग में तैनात सियासी हस्तियों को नहीं मिलेगी। जबकि इससे पहले आयोग की सदस्य नीरज गौतम ने मनमाने तरीके से तीन जिलों की जेलों का निरीक्षण भी कर डाला था।
सभी आयोगों के लिए नजीर बनेगा पत्र
सभी आयोगों में तैनात माननीय वीआईपी ट्रीटमेंट लेने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। एससी एसटी आयोग को राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग ने भी वीआईपी प्रोटोकॉल के संबंध में पत्र भेजा था। जहां आयोग के सदस्य जिलों में भ्रमण के दौरान वीआईपी सुविधाएं लेने के लिए छटपटा रहे थे। पिछड़ा वर्ग आयोग से महिला आयोग को भी पत्र भेजकर इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था। ऐसे में सीएम योगी के अधीन प्रोटोकॉल विभाग के इस पत्र को सभी आयोगों के लिए नजीर समझा जा रहा है।
सचिव बोले, पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी वीआईपी प्रोटोकॉल पर भेजा था पत्र
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सचिव मनोज कुमार सागर ने कहा कि सदस्यों ने प्रोटोकॉल की डिमांड उठायी थी। जिसके बाद एससी एसटी और महिला आयोग को पत्र भेजकर वहां जिलों में भ्रमण के दौरान सदस्यों को दी जाने वाली सुविधाओं पर स्थिति की जानकारी मांगी गयी थी। अध्यक्ष ने निर्देश दिए थे कि सभी आयोगों से इस संबंध में जानकारी हासिल की जाए।
क्या सीएम से ज्यादा है एससी-एसटी आयोग की माननीय सदस्य का जलवा?
एससी एसटी आयोग में सदस्यों की ठसक का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नीरज गौतम के निजी सचिव उमाकांत बाजपेयी ने जो भ्रमण कार्यक्रम बाराबंकी डीएम को भेजा था। उसमें साफ तौर पर लिखा था कि माननीय सदस्य जनपद के किसी भी विभाग, तहसील थाना और विकास खंड का औचक निरीक्षण कर सकती हैं। ऐसा रुतबा तो सीएम योगी के भ्रमण कार्यक्रम में भी नहीं दिखाया जाता है।
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