चीन में मेडिकल साइंस का कमाल, पहली बार इंसान में प्रत्यारोपित किया गया सुअर का लिवर

Sandesh Wahak Digital Desk: मेडिकल साइंस ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चीन के डॉक्टरों ने पहली बार आनुवंशिक रूप से संशोधित सुअर के लिवर को इंसान के शरीर में प्रत्यारोपित किया है। यह प्रत्यारोपण एक ब्रेन डेड मरीज पर किया गया, जिससे भविष्य में गंभीर लिवर रोगियों के इलाज की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था
चीन के शीआन में सैन्य चिकित्सा विश्वविद्यालय के डॉक्टरों ने इस अनूठे प्रत्यारोपण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस संबंध में ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अब तक सुअर के लिवर का इंसान के शरीर के अंदर परीक्षण नहीं किया गया था। यह एक ऐतिहासिक मेडिकल उपलब्धि मानी जा रही है, जिससे भविष्य में लिवर ट्रांसप्लांट के लिए नए विकल्प खुल सकते हैं।
कैसे किया गया प्रत्यारोपण?
जानकारी के मुताबिक, 10 मार्च 2024 को आनुवंशिक रूप से संशोधित एक छोटे सुअर का लिवर ब्रेन डेड मरीज में प्रत्यारोपित किया गया था। डॉक्टरों ने बताया कि इस प्रत्यारोपण का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि सुअर का लिवर इंसान के शरीर में कितने समय तक और कैसे काम करता है।
इस प्रयोग के तहत, मरीज के मूल लिवर को नहीं हटाया गया, बल्कि सुअर का लिवर एक सहायक ट्रांसप्लांट के रूप में लगाया गया। डॉक्टरों ने 10 दिनों तक लगातार इसकी निगरानी की और पाया कि सुअर का लिवर रक्त प्रवाह बनाए रखने, पित्त उत्पादन और एल्ब्यूमिन नामक प्रोटीन बनाने में सफल रहा।
परिणाम और भविष्य की संभावनाएं
इस ट्रांसप्लांट के 10 दिन बाद, मरीज के परिवार के अनुरोध पर परीक्षण समाप्त कर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि सुअर का लिवर अपेक्षा से बेहतर काम कर रहा था। लिन वांग, जो इस अध्ययन से जुड़े हैं, ने बताया कि यह सफलता भविष्य में लिवर फेलियर से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है।
सुअर के अंगों का बढ़ता उपयोग
अमेरिका और चीन में पिछले कुछ वर्षों में सुअर के हृदय और गुर्दे का प्रत्यारोपण भी किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आगे के परीक्षण सफल होते हैं, तो सुअर इंसानों के लिए एक प्रमुख अंगदाता (ऑर्गन डोनर) के रूप में उभर सकता है।
क्या होंगे अगले कदम?
अब वैज्ञानिक इस शोध को और आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि यह तकनीक उन लाखों मरीजों के लिए उपयोगी साबित हो, जो लिवर ट्रांसप्लांट के इंतजार में हैं। यदि भविष्य में यह प्रक्रिया सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो यह ऑर्गन ट्रांसप्लांट की दुनिया में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
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