महाघोटाला पार्ट 1: आवास विकास के अफसरों की दरियादिली, अंसल से नहीं वसूले 53 करोड़

Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: मुख्यमंत्री योगी ने चेताया था कि बिल्डरों से अफसर रिश्तेदारी न निभाएं। बिल्डरों की इसी रिश्तेदारी ने सुशांत गोल्फ सिटी के रूप में अंसल एपीआई के महाघोटाले की कलंक कथा यूपी में लिख डाली।
सिर्फ आवास विभाग या एलडीए ही नहीं बल्कि यूपी आवास एवं विकास परिषद (हाउसिंग बोर्ड)ने भी दागी बिल्डर के ऊपर अरबों की दरियादिली दिखाई है। अखिलेश सरकार के दौरान अफसरों ने परिषद के स्वामित्व वाली बरौना गांव की बेशकीमती भूमि सुनियोजित तरीके से अंसल को कौडिय़ों के भाव दे डाली। जमीन के बदले अंसल से अनुबंध हुआ था। जिसके तहत छोड़ी गयी 74.876 एकड़ भूमि के बदले 46 करोड़ 57 लाख 57 हजार 940 रूपए की धनराशि अंसल द्वारा परिषद में जमा कराई जानी थी। अंसल ने 25 फीसदी धनराशि भी आज तक नहीं दी है। 2019 में 13 करोड़ 16 लाख रुपये जमा कराने के बाद बिल्डर चुप्पी साध गया।
अभी नहीं शुरू हुई बकाया वसूली की कार्रवाई
इसके बावजूद अफसरों ने अंसल की गिरवी पड़ी करोड़ों की भूमि को जब्त करके बकाया वसूलने की कार्रवाई शुरू नहीं की। परिषद ने अंसल के खिलाफ आरसी जारी करके वसूली की जिम्मेदारी जिला प्रशासन पर डालकर मानो कर्तव्यों की इतिश्री कर कर ली। उप आवास आयुक्त हिमांशु कुमार ने 12 अप्रैल 2024 को लखनऊ के डीएम को पत्र भेजकर सुल्तानपुर रोड स्थित अवध विहार में अंसल एपीआई के पक्ष में योजना से छोड़ी गयी 74.876 एकड़ भूमि के विरुद्ध बकाया धनराशि की वसूली की मांग की थी।
पत्र के मुताबिक पिछले वर्ष 31 मार्च तक 53 करोड़ 14 लाख 42 हजार 24 रूपए की रकम अंसल से वसूली जानी थी। एक अप्रैल 2024 के बाद साढ़े 13 फीसदी की दर से दंड ब्याज भी वसूलने के लिए कहा गया था। ऐसे में धनराशि 55 करोड़ से कहीं ज्यादा हो चुकी है। परिषद के तत्कालीन अधिशाषी अभियंता सुनील कुमार ने अंसल को विधिक नोटिस देने के संबंध में 31 जनवरी 2025 को उप आवास आयुक्त (भूमि) को पत्र भेजा।
जिसमें उल्लेख था कि ग्राम बरौना के खसरा संख्या-32 रकबा 0.4515 हे0, खसरा संख्या-65 रकबा 0.3585 हे0, खसरा संख्या-66 रकबा 0.2370 हे0, खसरा संख्या-68 रकबा 0.1310 हे0, खसरा संख्या-71 रकबा 0.8120 हे. व खसरा संख्या-86 रकबा 2.6505 है0 भूमि उप निबन्धक, सरोजनीनगर के कार्यालय में 2019 को रजिस्ट्रीकृत हुई है। अंसल को 25 फीसदी एकमुश्त तथा बाकी 75 फीसदी धनराशि 2 वर्ष की चार छमाही किश्तों में ब्याज सहित जमा करना था। खैर करीब 10 वर्षों से मामले में सिर्फ चिट्ठीबाजी हो रही है।
कहीं बंधक भूमि अंसल एपीआई ने बेच तो नहीं दी
वर्षों से परिषद के अफसर अंसल द्वारा करोड़ों की वसूली के इन्तजार में हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। आशंका है, जिस अंदाज में अंसल ने एलडीए द्वारा बंधक भूमि बेचकर 400 करोड़ की चपत लगाई। उसी तर्ज पर परिषद के पास बंधक बरौना की करोड़ों की भूमि को भी बेच दिया गया हो। भूलेख संबंधी वेबसाइट बंधक खसरा संख्या 86 की भूमि 22 लोगों के नाम अंकित होना दिखा रही है।
बंधक जमीनों को नीलाम करके वसूली करेंगे : हिमांशु गुप्ता
आवास एवं विकास परिषद के उप आवास आयुक्त हिमांशु गुप्ता ने कहा कि पिछले वर्ष अंसल के खिलाफ आरसी जारी करके जिला प्रशासन से वसूली के लिए कहा गया था। कोई प्रगति नहीं होने पर अनुबंध की शर्तों के अधीन अंसल की बंधक जमीनों को नीलामी प्रक्रिया में ले जाकर परिषद बकाये की वसूली करेगा। इसकी प्रक्रिया भी दो माह से लंबित है। बंधक जमीन अंसल के नाम है और अभी खाली है। एनसीएलटी के आदेश पर विधिक राय ली जायेगी।
अब गाजियाबाद में अंसल के खिलाफ जालसाजी का केस दर्ज
अब गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक थाने में धोखाधड़ी-जालसाजी में अंसल ग्रुप के चेयरमैन प्रणव अंसल समेत विकास यादव, अमित शुक्ला और अन्य के खिलाफ जीडीए ने मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस आयुक्त अजय मिश्रा ने बताया कि टाउनशिप नीति का उल्लंघन करके डूंडाहेड़ा गांव में स्थित 99.75 एकड़ जमीन फर्जी दस्तावेज तैयार कर दूसरे लोगों को बेचने की जांच शुरू हो गई है।
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