Gonda News: गोण्डा के बेसिक शिक्षा विभाग में तय है अलग-अलग रेट!
भ्रष्टाचार पर शासन-प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखा रहा शिक्षा विभाग

Sandesh Wahak Digital Desk/A.R.Usmani: शासन-प्रशासन भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति का दम भर रहा है और इस पर नकेल कसने का दावा भी किया जा रहा है लेकिन विभागों की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है, जहां खुलेआम जीरो टॉलरेंस नीति का मखौल उड़ाया जा रहा है।
ताज़ा मामला गोंडा जिले के बेसिक शिक्षा विभाग का सामने आया है, जहां नवनियुक्त शिक्षकों का वेतन लगाने के नाम पर खुलेआम वसूली की जा रही है। इसके साथ ही मृतक आश्रित नियुक्तियों में भी दो से तीन लाख रूपए प्रति कैंडिडेट मांगे जाने का सनसनीखेज आरोप लगाया गया है। जिले का बेसिक शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। आरोप है कि 12460 शिक्षक भर्ती में नौकरी पाने वाले नवनियुक्त शिक्षकों का वेतन लगाने के नाम पर वसूली की जा रही है।
नवनियुक्त 645 शिक्षकों का वेतन लगाने के नाम पर खुलेआम वसूली का आरोप
बताते चलें कि 12,460 शिक्षक भर्ती के अन्तर्गत वर्ष 2024 में 645 शिक्षकों को तैनाती मिली थी। जुलाई में सभी को स्कूलों का आवंटन किया गया। जुलाई से ही नवनियुक्त शिक्षक स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। आठ महीने का समय बीतने के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग अभी तक सभी को वेतन नहीं दे सका। सत्यापन के नाम पर करीब 50 से अधिक शिक्षकों का वेतन अधर में लटका हुआ है। जिले के सेमरा कालोनी के रहने वाले राम सरन सिंह ने इसकी शिकायत देवी पाटन मंडल के आयुक्त शशि भूषण लाल सुशील से की है।
आरोप है कि बीएसए अतुल तिवारी अपने स्टेनो से मिलीभगत कर वेतन भुगतान के नाम पर नवनियुक्त शिक्षकों से वसूली करा रहे हैं। वेतन लगाने के बदले 15 से 20 हजार रूपए की वसूली खुलेआम की जा रही है। यह फिक्स रेट है। इतना ही नहीं, आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे जिले के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा मृतक आश्रित नियुक्तियों में भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति के लिए 2 से 3 लाख व शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए 4 से 5 लाख रुपये का रेट तय किया गया है।
यहां खुला खेल फर्रुखाबादी चल रहा है और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल तिवारी शिकायतों को अनसुनी करते आ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे बीएसए की शिथिल कार्यशैली के चलते ही जिले का शिक्षा महकमा बेपटरी हो चुका है और शिक्षक व अन्य कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं।
भ्रष्टाचार की शिकायत पर एक्शन में कमिश्नर
दरअसल, सेमरा कालोनी के रहने वाले राम सरन सिंह द्वारा देवीपाटन मंडल के आयुक्त शशिभूषण लाल सुशील से शिकायत की गयी। जिसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल तिवारी के साथ ही स्टेनो और एक शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता द्वारा उक्त अधिकारियों पर मृतक आश्रितों की नियुक्तियों में धन उगाही, वेतन सत्यापन के नाम पर रिश्वत लेने और शिक्षकों का शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि सत्यापन की प्रक्रिया को जान-बूझकर लंबित रखा जा रहा है और शिक्षकों से 15 से 20 हजार रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। जिनसे पैसे नहीं लिए गए, उनके वेतन रोके जाने के भी आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत में यह भी बताया गया है कि रिश्वत न देने वाले करीब 60 शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है, जिससे वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। आयुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने कहा कि मामला बहुत गंभीर है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। एडी बेसिक को जांच सौंपी गई है और एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गयी है।
एडी बेसिक ने शुरू की जांच, बीएसए से भी की पूछताछ
राम सरन सिंह द्वारा की गयी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त शशिभूषण लाल सुशील ने इसकी जांच देवीपाटन मंडल के एडी बेसिक को सौंपी है। आयुक्त के निर्देश पर एडी बेसिक राम सागर पति त्रिपाठी ने जांच शुरू कर दी है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर उन्होंने शिकायत की पड़ताल की। एडी बेसिक ने नवनियुक्त शिक्षकों की पत्रावली तलब कर शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन व वेतन भुगतान की स्थिति की भी जांच की।
शिकायत के संबंध में एडी ने बीएसए अतुल तिवारी से भी पूछताछ की है। एडी बेसिक करीब एक घंटे तक बीएसए कार्यालय पर रहे। इस दौरान कार्यालय के कर्मचारियों के चेहरे पर हवाइयां उड़ती रहीं। एडी बेसिक राम सागर पति त्रिपाठी ने बताया कि बीटीसी करने वाले कुछ शिक्षकों के अभिलेखों का सत्यापन अभी तक नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि सत्यापन ऑफ लाइन होना है। अन्य बिंदुओं की भी पड़ताल की गयी है। रिपोर्ट आयुक्त को भेजी जाएगी।
Also Read: Lucknow News: अखिलेश यादव के आवास के बाहर पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा, जानिए क्या है पूरा मामला