संपादक की कमल से: महिला सुरक्षा के दावे की हकीकत

Sandesh Wahak Digital Desk: यूपी सरकार के महिला सुरक्षा के दावों की हकीकत लगातार सामने आ रही है। मलिहाबाद में ऑटो चालक द्वारा महिला की हत्या और लूट मामले के बाद भी हालात में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। रविवार को महानगर में एक ई-रिक्शा चालक युवती को लेकर भागा तो दूसरी ओर दुबग्गा में एक दूसरे ई-रिक्शा चालक ने महिला के साथ छेड़छाड़ की। हालांकि दोनों मामलों में चालकों को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन इसने यह जरूर स्पष्टï कर दिया है कि सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल अकेली महिला के लिए खतरनाक साबित होता जा रहा है।
सवाल यह है कि:
- क्या सार्वजनिक वाहन महिलाओं के लिए असुरक्षा का सबब बन गए हैं?
- क्या पुलिस की लापरवाही के कारण हालात बिगड़े हैं?
- ऑटो व ई-रिक्शा चालकों का सत्यापन क्यों नहीं किया जा रहा है?
- इनकी समय-समय पर निगरानी की व्यवस्था क्यों नहीं बनायी जा रही है?
- क्यों अपराधी किस्म के लोग सार्वजनिक वाहनों को चला रहे हैं और मौका देखकर लूटपाट और हत्या जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं?
- क्यों मुख्यमंत्री को टेम्पो व ई-रिक्शा चालकों का सत्यापन करने के लिए अलग से आदेश देना पड़ा?
प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा के दावे करती थकती नहीं है लेकिन प्रदेश की राजधानी में ही इनकी सुरक्षा तार-तार दिखाई दे रही है। मलिहाबाद की घटना इसका ताजा उदाहरण है। इस घटना के बाद महिलाएं अकेले ऑटो पर यात्रा करने से डरने लगी हैं। जब लखनऊ में यह हाल है तो प्रदेश के अन्य जिलों के बारे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
दरअसल, लखनऊ में आस-पास और अन्य जिलों से लोग रोजगार की तलाश में पहुंचते हैं। इसमें कुछ ऑटो या ई-रिक्शा चलाकर अपनी जीविका चला रहे हैं। इसमें स्थानीय लोग भी शामिल हो गए हैं। अकेले राजधानी में हजारों की संख्या में ऑटो व ई-रिक्शा चलाए जा रहे हैं।
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हैरानी की बात यह है कि इन ऑटो चालकों का सत्यापन पुलिस द्वारा नहीं किया जाता है। लिहाजा इसका फायदा आपराधी किस्म के लोग भी उठाते हैं। मलिहाबाद कांड के दोनों ही आरोपी अपराधी किस्म के थे और उन पर कई मुकदमे चल रहे थे। ऐसे कई चालक अभी भी सडक़ों पर घूम रहे हैं। यदि पुलिस इस मामले में शुरू से ही सख्ती बरतती तो महिलाओं को आज असुरक्षित महसूस नहीं करना पड़ता। यही वजह है कि खुद मुख्यमंत्री को टेम्पो-ई-रिक्शा चालकों के सत्यापन का आदेश देना पड़ा।
अब यह देखना होगा कि सीएम के आदेश को कितनी शिद्दत से पुलिस जमीन पर उतारती है या सत्यापन के नाम पर खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा कर देती है। जाहिर है सरकार को इसे गंभीरता से लेना होगा सिर्फ राजधानी ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में टेम्पो-ई-रिक्शा चालकों के सत्यापन का व्यापक अभियान चलाना होगा। अपराधी किस्म के चालकों को चिन्हित कर उन्हें कानून के शिकंजे में कसना होगा वरना मलिहाबाद की घटना रिपीट हो सकती है।