वक्फ बिल पर बढ़ी तकरार, अखिलेश बोले- हम इसके खिलाफ, JDU ने बढ़ाया सस्पेंस

Waqf Bill: केंद्र की मोदी सरकार कल (2 अप्रैल) लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किए जाने की तैयारी कर रही है. इससे पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है.

Waqf Bill

दरअसल, सपा अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने बीजेपी पर हमला बोला है. वहीं, एनडीए की सहयोगी जेडीयू ने भी साफ कह दिया है कि वो वक्फ संशोधन विधेयक पर संसद में स्टैंड लेगी.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि हम इस बिल के खिलाफ हैं. वक्फ बिल के खिलाफ हैं. क्योंकि बीजेपी हर जगह अपना कंट्रोल चाहती है. ये सरकार हर जगह हस्तक्षेप कर रही है. और हर जगह कंट्रोल चाहती है.

‘मुस्लिम में डर है तो जायज है’

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वहीं, सपा के राज्यसभा सांसद और पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि देश में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की योजना बनाई गई. इनका उद्देश्य यही है कि कैसे देश का सद्भाव बिगाड़ दें. लोगों की हत्या की जा रही है. लोगों को मारा जा रहा है. लोगों को पुलिस प्रोटेक्शन में मारा जा रहा है. अगर मुसलमानों में डर है, तो जायज है.

नीतीश ने मुसलमानों के लिए काम किया- जेडीयू

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वक्फ बिल पर जेडीयू ने बड़ा बयान दिया. दरअसल, जेडीयू ने कहा कि नीतीश कुमार ने मुसलमानों के लिए बहुत काम किया है. संसद में हम अपना रुख साफ करेंगे.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन ललन सिंह ने कहा कि JDU, नीतीश को विपक्ष के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. विपक्ष को अपने अंदर झांकना चाहिए. कांग्रेस ने मुसलमानों के लिए क्या किया, वो बताए. नीतीश जी ने मुसलमानों के लिए काम किया है. नीतीश जी ने मुसलमानों के लिए इतना काम किया, जितना किसी शासन ने नहीं किया.

उन्होंने आगे कहा कि नीतीश जी ने दंगा पीड़ित परिवारों को न्याय दिया. कांग्रेस, विपक्ष के लिए धर्मनिरपेक्षता सिर्फ वोट बैंक की पॉलिटिक्स है. लोकसभा का इंतजार करिए. पार्टी का स्टैंड वहां क्लियर होगा.

‘मस्जिद का यूज आज सियासत के लिए हो रहा’

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वहीं, BJP सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि बिल सरकार आम लोगों की बेहतरी के लिए ला रही है. जिससे गरीबों को मदद मिले. लेकिन विपक्षी दल राजनीति कर रहे हैं. मस्जिदों का इस्तेमाल इबादत के लिए हुआ है. लेकिन कभी सियासत के लिए नहीं हुआ, वो अब हो रहा है.

AIMPLB ने इस बार इबादत की जगह मस्जिदों से ही सियासत करवा दी. ओवैसी, अखिलेश या राहुल क्या बताएंगे कि यह कानून बेहतर होने जा रहा है या बेकार. अगर 428 पेज पढ़ने का वक्त हो तो पढ़ें. मुस्लिमों को बरगलाएं नहीं. विरोध जंतर-मंतर पर किया जाता है या मस्जिदों में?

आजादी के बाद पहली बार मस्जिदों का यह दुरुपयोग हुआ. कहीं मस्जिद या ईदगाह नहीं ली जा रही है. हम बिल पर चर्चा करना चाह रहे हैं. बिना बिल आए पहले विरोध करना गलत है. लगातार झूठ बोला जा रहा है. रमजान के महीने में तो ओवैसी या AIMPLB को झूठ नहीं बोलना चाहिए.

वहीं, कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा, ‘सरकार को वक्फ बिल पर खुले मन से चर्चा करनी चाहिए. जेपीसी में कांग्रेस ने जो सुझाव दिए थे, अगर सरकार मान लेती तो ठीक रहता. सरकार से मैं कहना चाहता हूं कि जल्दबाजी में और आपाधापी में इस तरह का बिल सदन से पास ना करे.’

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वहीं, AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल को लेकर कहा कि ये वक्फ बर्बाद बिल है. इनका एक ही मकसद है- मुसलमानों से नफरत और हिंदुत्व की आइडियोलॉजी को लाना. चंद्रबाबू नायडू को सोचना चाहिए कि वो क्या करवाना चाह रहे हैं.

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